हाजीपुर (वैशाली)। पूर्व न्यायाधीश स्वर्गीय अल्हाज अब्दुल रहीम अंसारी की प्रथम पुण्यतिथि पर उनकी पुस्तक ‘फैक्ट्स पार्ट-III’ का लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। वक्ताओं ने उन्हें विद्वान न्यायाधीश, गंभीर अध्येता और संवेदनशील लेखक बताते हुए कहा कि उनकी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेंगी।
साउथ एशिया के देशों में मानवाधिकार पत्रकारिता के संवाहक डॉ. शशि भूषण कुमार,प्रधान संपादक मानवाधिकार टुडे, ने कहा कि उन्होंने अंसारी साहब को हिंदी में लेखन के लिए प्रेरित किया था। इसके बाद उन्होंने मानवाधिकार टुडे में अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर लेख लिखे और आगे चलकर हिंदी में भी पुस्तकें प्रकाशित कीं। उन्होंने कहा, “लेखक दुनिया से विदा होते हैं, लेकिन उनकी लेखनी और विचार अमर रहते हैं।”
सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश अकबर रजा जमशीद ने कहा कि अंसारी साहब ने अपना जीवन ज्ञान और अध्ययन को समर्पित किया। न्यायिक सेवा के साथ कुरआन और हदीस के अध्ययन में उनकी गहरी रुचि थी। उन्होंने उनके पुत्रों शाहिद लतीफ और खालिद लतीफ तथा अनवारुल हसन वस्तवी के प्रयासों की सराहना की, जिनके सहयोग से पुस्तक प्रकाशित हुई।
अमीरात-ए-शरिया के उपनिदेशक मुफ्ती सनाउल हुदा कासमी ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद अंसारी साहब ने कुरआन के अध्ययन को विशेष रूप से अपनाया। उनके अध्ययन और चिंतन की झलक इस पुस्तक में दिखाई देती है।
दैनिक कौमी तंजीम के प्रधान संपादक एस.एम. शराफ फरीद ने कहा कि हाजीपुर की धरती उर्दू साहित्य के लिए बेहद उपजाऊ रही है। अंसारी साहब ने अपनी लेखनी से ऐसी विरासत छोड़ी है, जिससे उनका नाम हमेशा जीवित रहेगा। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों, विशेषकर लड़कियों को उर्दू की शिक्षा देने की अपील की।
वरिष्ठ पत्रकार डॉ. रेहान गनी ने कहा कि अंसारी साहब की रचनाओं का प्रकाशन उर्दू साहित्य के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद जगाता है। वहीं, पत्रकार अनवारुल हुदा ने कहा कि उन्होंने कुरआन और हदीस से अर्जित ज्ञान को दूसरों तक पहुंचाने का सराहनीय कार्य किया। उनकी पुस्तकें उन्हें हमेशा हमारे बीच जीवित रखेंगी।
ओपन नारा अखबार के संपादक डॉ अनवारुल हुडा ने अब्दुल अंसारी साहब के व्यक्तित्व कृतित्व की विस्तार से चर्चा करते हुए उनके साहित्यिक योगदान को भी अपने शब्दों में बयां किया और उनके लिए द्वारा लिखे गए तीन हिंदी और तीन उर्दू के पुस्तक लिखने के शैली और अंदाज के की खूब सराहना कीl
डॉ. जफीरुद्दीन अंसारी ने भी अपने संबोधन में दिवंगत की विद्वत्ता और योगदान को याद किया।
स्वागत भाषण में लेखक अनवारुल हसन वस्तवी ने अंसारी साहब के साहित्यिक एवं शैक्षणिक योगदान पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आरिफ हसन वस्तवी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन उनके दामाद एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी नैयर इकबाल ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत हाफिज मुहम्मद रेहान की कुरआन तिलावत से हुई।
समारोह में सैयद अबू सालेह, इश्तियाक अहमद खान, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, मिस्बाहुद्दीन अहमद अजीमाबादी अंसारी, डॉ. जमाल अंसारी, इजहारुल हक अजहर, तौकीर सैफी, नजरुल हुदा कासमी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।









