ऊर्जा को मिले सही दिशा, तो जीवन बनता है परिवर्तन की धारा-बिमल सर्राफ

 

 

रक्सौल, पूर्वी चंपारण।

जीवन एक बहती हुई नदी है। उसमें गति है, ऊर्जा है, संभावनाएं हैं और परिवर्तन की अपार शक्ति भी। लेकिन नदी का प्रवाह तभी सार्थक होता है, जब उसे अपनी मंजिल का मार्ग पता हो। ठीक इसी तरह मनुष्य के भीतर प्रतिभा और ऊर्जा का होना पर्याप्त नहीं है, उसे सही दिशा और सार्थक उद्देश्य मिलना भी उतना ही आवश्यक है। दिशाहीन ऊर्जा जहां भटकाव पैदा करती है, वहीं सही दिशा पाकर वही ऊर्जा इतिहास और समाज में परिवर्तन की धारा बन सकती है।

नदी जब अपने मार्ग पर बहती है तो खेतों को सींचती है, प्यास बुझाती है और जीवन को आगे बढ़ाती है। लेकिन उसका प्रवाह रुक जाए तो निर्मल जल भी धीरे-धीरे सड़ने लगता है। मनुष्य का जीवन भी इससे अलग नहीं है। उद्देश्यहीनता और दिशाहीनता उसकी क्षमताओं को भीतर ही भीतर कमजोर कर देती है। जो ऊर्जा सृजन में लग सकती थी, वह चिंता, निराशा और आत्मसंघर्ष में नष्ट होने लगती है।

उक्त विचार लायंस क्लब इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 322ई, जोन 41 के जोन चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन एवं भारत विकास परिषद्, रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर किसी न किसी विशेष क्षमता और प्रतिभा का बीज लेकर जन्म लेता है। जरूरत उस बीज को पहचानने, सींचने और सही दिशा देने की है। जीवन में माता-पिता, शिक्षक, सद्गुरु और मार्गदर्शक इसी भूमिका को निभाते हैं। वे भटके मन को दिशा, चंचल विचारों को स्थिरता और बिखरी ऊर्जा को उद्देश्य प्रदान करते हैं। सही मार्गदर्शन मिलने पर एक सामान्य व्यक्ति भी असाधारण कार्य करने की क्षमता हासिल कर सकता है।

आज समाज के सामने सबसे बड़ी आवश्यकता प्रतिभाओं को केवल पहचानने की नहीं, बल्कि उन्हें अवसर देने और लोकहित से जोड़ने की है। विद्वान अपनी बुद्धि से समाज को नई सोच दें, कलाकार और रचनाकार संवेदनाओं को जगाएं, वैज्ञानिक नई संभावनाओं के द्वार खोलें, शिक्षक ज्ञान के साथ संस्कार और दृष्टि दें तथा संपन्न लोग अपनी संपदा को विलासिता के बजाय जनकल्याण का माध्यम बनाएं। राजनीति में भी ऐसे लोगों की आवश्यकता है, जो पद को प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि जनसेवा की जिम्मेदारी समझें।

वास्तविक परिवर्तन तब शुरू होता है, जब व्यक्ति यह सोचना छोड़ देता है कि “मुझे क्या मिलेगा?” और यह पूछना शुरू करता है कि “मेरी क्षमता से समाज को क्या मिल सकता है?” यही सोच प्रतिभा को उपलब्धि से सेवा और व्यक्तिगत सफलता को सामाजिक सार्थकता में बदल देती है।

युग-परिवर्तन किसी एक व्यक्ति के प्रयास से संभव नहीं होता। जब समाज के विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाएं एक सकारात्मक उद्देश्य के साथ आगे आती हैं, तो परिवर्तन की सामूहिक शक्ति जन्म लेती है। जैसे वर्षा की बूंदें मिलकर नदी का प्रवाह बनाती हैं, वैसे ही छोटी-छोटी प्रतिभाएं और सकारात्मक प्रयास मिलकर बड़े सामाजिक परिवर्तन की आधारशिला रखते हैं।

इसलिए प्रतिभाओं को अवसर देना, उनका उत्साह बढ़ाना और उन्हें सही दिशा दिखाना समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। प्रतिभा को यदि दिशा मिले, ऊर्जा को उद्देश्य मिले और सफलता को सेवा से जोड़ दिया जाए, तो व्यक्ति केवल अपना जीवन नहीं बदलता, वह अपने आसपास की दुनिया बदलने की क्षमता भी पैदा करता है।

भावार्थ यही है कि जीवन की असली शक्ति उसकी गति में नहीं, बल्कि उस गति की दिशा में है। सही दिशा में बहती ऊर्जा ही सृजन करती है, प्रतिभा को सार्थक बनाती है और अंततः व्यक्ति के जीवन को समाज एवं राष्ट्र के लिए परिवर्तन की धारा में बदल देती है।

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