रक्सौल, पूर्वी चंपारण।
मनुष्य की सबसे बड़ी कमजोरी तब शुरू होती है, जब वह स्वयं को दूसरों से श्रेष्ठ समझने लगता है। अहंकार धीरे-धीरे उसकी समझ, योग्यता और लोकप्रियता को कमजोर कर देता है। इसके विपरीत, विनम्रता इंसान को सम्मान दिलाती है और अच्छे कर्म उसे समाज में अलग पहचान देते हैं।
जीवन में हर व्यक्ति की सोच अलग होती है। आँखें सबके पास होती हैं, लेकिन दुनिया को देखने का नजरिया सबका एक जैसा नहीं होता। कोई कठिनाई में भी अवसर खोज लेता है, तो कोई सफलता मिलने पर भी असंतुष्ट रहता है। वास्तव में, हमारी सोच ही हमारे व्यवहार और जीवन की दिशा तय करती है।
समय से बड़ा शिक्षक कोई नहीं। सुख और दुःख जीवन के दो ऐसे पड़ाव हैं, जो बारी-बारी से आते हैं। सुख हमें खुश रहना सिखाता है, तो दुःख हमें धैर्य, संघर्ष और अनुभव का महत्व समझाता है। इसलिए अच्छे समय का इंतजार करने के बजाय, जो समय मिला है, उसे अच्छा बनाने की कोशिश करनी चाहिए। बीता हुआ समय लौटकर नहीं आता, लेकिन वर्तमान का सही उपयोग भविष्य बदल सकता है।
जीवन में झूठ बोलकर कुछ समय के लिए लोगों को प्रभावित किया जा सकता है, लेकिन विश्वास केवल सच और ईमानदारी से जीता जाता है। समझदार व्यक्ति हर बात का जवाब तुरंत नहीं देता। वह धैर्य से सुनता है, परिस्थितियों को समझता है और फिर उचित निर्णय लेता है। हर बहस में जीतना जरूरी नहीं, कई बार मौन रहकर अपने आचरण से सच्चाई साबित करना अधिक प्रभावशाली होता है।
इंसान की असली सुंदरता उसके चेहरे में नहीं, उसके चरित्र में होती है। मीठी वाणी, अच्छे विचार, दूसरों के प्रति सम्मान, संवेदनशील व्यवहार और सेवा की भावना ही व्यक्तित्व को सुंदर बनाते हैं। पद और प्रतिष्ठा कुछ समय के लिए पहचान दिला सकते हैं, लेकिन अच्छे संस्कार जीवनभर सम्मान दिलाते हैं।
आज समाज में एक बड़ी समस्या यह भी है कि लोग अपने जीवन के फैसले अपनी समझ से कम और दूसरों की राय से अधिक लेने लगे हैं। लोग क्या कहेंगे, इस चिंता में कई लोग अपनी खुशियाँ, इच्छाएँ और संभावनाएँ खो देते हैं। जबकि जीवन का उद्देश्य हर व्यक्ति को खुश करना नहीं, बल्कि सही रास्ते पर चलते हुए अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करना है। दूसरों की सलाह सुनना समझदारी है, लेकिन अपनी अंतरात्मा की आवाज को अनदेखा करना उचित नहीं।
योग्यता जन्म से नहीं, बल्कि मेहनत, अनुशासन, अनुभव और निरंतर सीखने से विकसित होती है। जो व्यक्ति अपनी गलतियों को स्वीकार करता है, वह आगे बढ़ता है; लेकिन जो अहंकार में अपनी गलती मानने से इनकार करता है, उसकी प्रगति रुक जाती है। मनुष्य जब अपनी सोच बदलता है, तो उसके निर्णय बदलते हैं और निर्णय बदलने से जीवन की दिशा भी बदल सकती है।
मेरे विचार से, जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि दूसरों से आगे निकलना नहीं, बल्कि कल के अपने स्वरूप से बेहतर बनना है। किसी की सफलता देखकर ईर्ष्या करने के बजाय उससे प्रेरणा लेनी चाहिए। किसी की कमजोरी का मजाक उड़ाने के बजाय उसका हौसला बढ़ाना चाहिए। और यदि किसी के जीवन में हमारी वजह से थोड़ी-सी भी खुशी आ सकती है, तो यह किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं।
याद रखिए, अहंकार व्यक्ति को अकेला करता है, जबकि विनम्रता लोगों के दिलों में जगह बनाती है। सच्चे मन से किए गए अच्छे कर्मों का मूल्य हमेशा तुरंत नहीं मिलता, लेकिन उनका प्रभाव लोगों के जीवन में लंबे समय तक बना रहता है। इसलिए बिना दिखावे के नेक काम करते रहिए, बिना घमंड के अपनी सफलता का आनंद लीजिए और बिना निराश हुए अपने कर्तव्य के रास्ते पर आगे बढ़ते रहिए।
अंततः जीवन की सार्थकता इस बात से तय नहीं होती कि हमने कितना धन कमाया, कितने लोगों को प्रभावित किया या कितनी प्रशंसा प्राप्त की। असली सवाल यह है कि हमने कितने लोगों का विश्वास जीता, कितनों के दुःख कम किए और अपने व्यवहार से कितने दिलों में जगह बनाई।
क्योंकि इंसान की पहचान उसकी ऊँची आवाज से नहीं, उसके ऊँचे विचारों से होती है; उसकी महानता अहंकार से नहीं, उसके संस्कारों और कर्मों से पहचानी जाती है।
— बिमल सर्राफ
जोन चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन
डिस्ट्रिक्ट 322ई, जोन 41 (26-27), लायंस क्लब इंटरनेशनल
सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी, भारत विकास परिषद्, रक्सौल









