खैरात नहीं,अधिकार और अवसर चाहिए – तभी मिटेगी गरीबी! : बिमल सर्राफ 

 

 

रक्सौल पूर्वी चंपारण

जिस दुनिया में दौलत के पहाड़ खड़े हों और इंसान भूखा सोए, वहां सवाल सिर्फ गरीबी का नहीं, हमारी व्यवस्था और संवेदनशीलता का भी है।

गरीबी केवल खाली जेब नहीं, बल्कि भूखे पेट सोता बचपन, अधूरे सपने, इलाज के अभाव में बेबस परिवार और मेहनत के बावजूद अवसरों से वंचित इंसान की पीड़ा है।

विश्व से लेकर भारत तक गरीबी के खिलाफ लड़ाई में प्रगति हुई है, लेकिन मंजिल अभी दूर है। योजनाएं तभी सार्थक हैं, जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। भूखे को भोजन देना जरूरी है, लेकिन भूख मिटाने का स्थायी रास्ता रोजगार है; बच्चे को किताब देना अच्छा है, लेकिन उसकी शिक्षा पूरी कराना असली जिम्मेदारी है।

गरीबों को खैरात का मोहताज बनाना समाधान नहीं। उन्हें शिक्षा, कौशल, रोजगार और सम्मान के अवसर देना ही सच्चा सशक्तीकरण है। सरकार जवाबदेह बने, उद्योग रोजगार पैदा करें और समाजसेवी संस्थाएं सेवा को आत्मनिर्भरता से जोड़ें।

 

आइए, गरीबी को केवल आंकड़ों में घटाने का नहीं, इंसानी जिंदगी में बदलने का संकल्प लें। किसी बच्चे का भविष्य गरीबी तय न करे, किसी परिवार की मजबूरी उसका सम्मान न छीने और किसी मेहनतकश के सपने अवसरों के अभाव में दम न तोड़ें।

याद रखिए—गरीब को दान देकर एक दिन की जरूरत पूरी हो सकती है, लेकिन अवसर देकर पीढ़ियों की तकदीर बदली जा सकती है।

गरीब पर दया नहीं, उसके अधिकारों का सम्मान कीजिए; उसे खैरात नहीं, अवसर दीजिए। क्योंकि गरीबी उन्मूलन कोई उपकार नहीं, एक न्यायपूर्ण समाज के निर्माण की अनिवार्य शर्त है।

उक्त विश्लेषण लायंस क्लब इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 322ई,जोन 41 के जोन चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।

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