अन्न का सम्मान,मानवता का सम्मान विश्व खाद्य दिवस पर संकल्प—उतना ही लें थाली में, व्यर्थ न जाए – बिमल सर्राफ

 

 

रक्सौल, पूर्वी चंपारण

अन्न केवल भूख मिटाने का साधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार और किसान के कठिन परिश्रम का फल है। अन्न के एक-एक दाने के पीछे किसान का पसीना, प्रकृति की कृपा और अनेक लोगों का श्रम जुड़ा होता है। इसके बावजूद जब भोजन थाली में छोड़ दिया जाता है या कूड़े में फेंक दिया जाता है, तो यह चिंता का विषय बन जाता है।

हर वर्ष 16 अक्टूबर को विश्व खाद्य दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को भूख, कुपोषण और भोजन की उपलब्धता के प्रति जागरूक करना है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि भोजन पाना हर व्यक्ति का अधिकार है और अन्न की बर्बादी रोकना हम सबकी जिम्मेदारी।

खाद्यान्न उत्पादन में भारत की मजबूत स्थिति

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भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहां के मेहनती किसानों ने देश को खाद्यान्न उत्पादन के क्षेत्र में मजबूत बनाया है। आज भारत गेहूं, चावल, दालों, सब्जियों और अनेक कृषि उत्पादों का प्रमुख उत्पादक है। सरकारी योजनाओं और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से करोड़ों लोगों तक अनाज पहुंचाया जाता है।

लेकिन सवाल यह है कि जब देश में पर्याप्त अनाज पैदा होता है, तब भी अनेक लोगों को भरपेट भोजन और पर्याप्त पोषण क्यों नहीं मिल पाता?

इसका कारण केवल अनाज की कमी नहीं, बल्कि गरीबी, बेरोजगारी, भोजन की ऊंची कीमतें, असमान वितरण और जागरूकता की कमी भी है। केवल पेट भरना ही पर्याप्त नहीं है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए दाल, दूध, फल, हरी सब्जियां और पौष्टिक भोजन भी जरूरी हैं।

दुनिया के सामने भूख एक बड़ी चुनौती

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आज दुनिया विज्ञान, तकनीक और आर्थिक विकास के क्षेत्र में बहुत आगे बढ़ चुकी है। इसके बावजूद अनेक देशों में लोग भूख और कुपोषण से जूझ रहे हैं। कहीं युद्ध और संघर्ष के कारण भोजन की कमी है, तो कहीं गरीबी और प्राकृतिक आपदाओं के कारण लोगों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पाता।

भारत ने खाद्यान्न उत्पादन में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन बच्चों और गरीब परिवारों तक पर्याप्त पोषण पहुंचाना अभी भी एक बड़ी चुनौती है। देश की असली सफलता तभी मानी जाएगी, जब कोई भी बच्चा भूखा न सोए और हर परिवार को पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो।

 

भोजन की बर्बादी रोकना भी जरूर

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एक ओर गरीब परिवार भोजन के लिए संघर्ष करते हैं, वहीं दूसरी ओर विवाह समारोहों, होटलों, सामाजिक आयोजनों और घरों में बड़ी मात्रा में भोजन बर्बाद होता है। यह स्थिति हमें सोचने पर मजबूर करती है।

भोजन की बर्बादी के साथ किसान का श्रम, पानी, बिजली, ईंधन और प्रकृति के संसाधन भी व्यर्थ होते हैं। इसलिए हमें अपनी आदतों में बदलाव लाना होगा। थाली में उतना ही भोजन लें, जितना खा सकें। बचा हुआ सुरक्षित भोजन जरूरतमंदों तक पहुंचाने का प्रयास करें और सामाजिक आयोजनों में भोजन की बर्बादी रोकने की व्यवस्था बनाएं।

### सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी

भूख और कुपोषण को दूर करने के लिए सरकार, समाज और प्रत्येक नागरिक को मिलकर प्रयास करना होगा। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए। अनाज के भंडारण और परिवहन की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि खेत से बाजार तक पहुंचने में खाद्यान्न खराब न हो।

बच्चों, गर्भवती महिलाओं और जरूरतमंद परिवारों के पोषण पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। विद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से लोगों को संतुलित भोजन और खाद्य पदार्थों के सही उपयोग के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए।

हम सभी को यह समझना होगा कि अन्न की रक्षा केवल सरकार का काम नहीं है। इसकी शुरुआत हमारे अपने घर, रसोई और भोजन की थाली से होती है।

### अन्न बचाएं, मानवता निभाएं

विश्व खाद्य दिवस केवल एक दिन मनाने का अवसर नहीं, बल्कि अपने व्यवहार में बदलाव लाने का संदेश है। भारत जैसे विशाल देश में यदि हर व्यक्ति भोजन की बर्बादी रोकने का संकल्प ले, तो इसका बड़ा सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

आइए, इस विश्व खाद्य दिवस पर हम संकल्प लें कि न अन्न का अपमान करेंगे, न भोजन बर्बाद करेंगे और न ही अपने आसपास किसी जरूरतमंद को भूखा देखने के प्रति उदासीन रहेंगे।

**“उतना ही लें थाली में, व्यर्थ न जाए नाली में।”**

याद रखिए, अन्न का सम्मान किसान के परिश्रम का सम्मान है, प्रकृति के संरक्षण का प्रयास है और मानवता के प्रति हमारी सच्ची जिम्मेदारी है। जिस दिन देश का हर नागरिक इस भावना को अपने जीवन में उतार लेगा, उस दिन भूख और बर्बादी के विरुद्ध हमारी लड़ाई और मजबूत होगी।

**अन्न बचाना केवल एक अच्छी आदत नहीं, बल्कि एक बेहतर, संवेदनशील और समृद्ध भारत के निर्माण का संकल्प है।**

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