खुद को सबसे समझदार समझना ही सबसे बड़ा भ्रम है-बिमल सर्राफ

 

रक्सौल, पूर्वी चंपारण।

जीवन में सबसे बड़ा भ्रम शायद यही है कि “मैं ही समझदार हूं और बाकी सब नादान हैं।” यह सोच धीरे-धीरे व्यक्ति के भीतर अहंकार पैदा करती है और वह दूसरों की अच्छाइयों, अनुभवों और सलाह को नजरअंदाज करने लगता है। जबकि सच्ची समझदारी यह स्वीकार करने में है कि हर इंसान से कुछ न कुछ सीखा जा सकता है।

जिस तरह जंगल में जड़ी-बूटी वही पहचान पाता है जिसे उसका ज्ञान हो, उसी तरह जीवन की गलतियों से सीख और ईश्वर की भूमिका वही समझ पाता है, जो अपने भीतर झांकना जानता है।

हमारे दोनों पैर इसका सरल उदाहरण हैं। चलते समय एक आगे होता है और दूसरा पीछे, लेकिन न आगे वाले को अभिमान होता है और न पीछे वाले को अपमान। दोनों जानते हैं कि थोड़ी देर बाद स्थिति बदल जाएगी। जीवन भी ऐसा ही है—आज जो आगे है, कल पीछे हो सकता है।

जो व्यक्ति अपने परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर खड़ा होना सीख जाता है, वह किसी के आने-जाने से आसानी से नहीं टूटता। उसे पता होता है कि मुश्किल समय में भी वह दोबारा शुरुआत कर सकता है। ऐसे व्यक्ति के लिए किसी का साथ महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन जीवन का आधार केवल किसी दूसरे व्यक्ति पर निर्भर नहीं होता।

मुश्किल समय में हमें दो तरह के लोग मिलते हैं। कुछ हमारी परेशानी सुनकर केवल सहानुभूति देते हैं, जबकि कुछ हमारी कमियां बताकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। मीठी बातें उस समय अच्छी लगती हैं, लेकिन कई बार कड़वी बात ही हमें अपनी वास्तविक स्थिति समझाती है। इसलिए हर बात सुनकर खुश होने के बजाय यह समझना जरूरी है कि कौन हमें कमजोर कर रहा है और कौन मजबूत बना रहा है।

मनुष्य की असली पहचान उसके स्वार्थ से नहीं, बल्कि इस बात से होती है कि वह दूसरों के सुख-दुःख में कितना खड़ा होता है। अपने लिए जीना आसान है, लेकिन किसी दूसरे के लिए अपना समय, सुविधा या सुख छोड़ना ही मनुष्यता है।

जीवन में हर घटना हमारे मन के अनुसार नहीं होती। कुछ बातें हमें अच्छी लगती हैं और कुछ हमें तोड़ देती हैं। लेकिन हर समय यह सोचते रहना कि ऐसा क्यों हुआ और आगे क्या होगा, मन को और परेशान करता है। हमारा काम ईमानदारी से प्रयास करना है; हर परिणाम को अपने नियंत्रण में रखना संभव नहीं।

उक्त विचार लायंस क्लब इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 322ई जोन 41 के जोन चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने व्यक्त किया।

आत्मविश्वास हमें अपने पैरों पर खड़ा करता है, अनुभव हमें विनम्र बनाता है और ईश्वर पर विश्वास हमें कठिन समय में संभालता है। इसलिए खुद को सबसे समझदार और दूसरों को नादान समझने के भ्रम से बाहर निकलना ही जीवन की वास्तविक समझदारी है।

क्योंकि जिंदगी में कोई हमेशा आगे नहीं रहता और कोई हमेशा पीछे नहीं रहता। समय बदलता है, परिस्थितियां बदलती हैं और इंसान को भी बदलना पड़ता है।

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